राधा–कृष्ण देहली लौटे तो खुशी से भर आई आंखे ! डीजे की धुन पर झूमे श्रद्धालु

 
अंगद राही : 9451250668
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रायबरेली (शिवगढ़)। आस्था पर जब चोट पड़ती है तो दर्द पूरे गांव को महसूस होता है, और जब वही आस्था सकुशल लौट आए तो खुशी भी सामूहिक होती है। कुछ ऐसा ही दृश्य बुधवार को शिवगढ़ क्षेत्र के ग्राम पंचायत देहली में देखने को मिला, जब राधा–कृष्ण मन्दिर से चोरी हुई बेशकीमती राधा-कृष्ण की मूर्तियां बरामद होकर गांव लौटीं। 

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जैसे ही यह जानकारी ग्रामीणों को मिली पूरे देहली गांव में खुशी की लहर दौड़ गई। हर चेहरे पर सुकून था और आंखों में भक्ति से भरे आंसू। गौरतलब है कि 23 जनवरी की रात अज्ञात चोरों ने मन्दिर का ताला तोड़कर राधा–कृष्ण की बेशकीमती मूर्तियां पार कर दी थीं। 


अगले दिन सुबह जब पुजारी गंगा प्रसाद पाण्डेय मन्दिर लाइट बुझाने पहुंचे तो बगल में ताला टूटा पड़ा था मन्दिर के अन्दर का नजारा देख उनके पैरों तले से जमीन खिसक गई। गांव में मातम सा छा गया। आस्था के इस अपमान से हर श्रद्धालु व्यथित था। पुजारी की तहरीर पर शिवगढ़ पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की, वहीं गांव के युवाओं ने भी दिन-रात एक कर मूर्तियों की तलाश में कोई कसर नहीं छोड़ी।
बुधवार की सुबह यह खबर आई कि चोरी हुई मूर्तियां बाराबंकी जिले के लोनी कटरा थाना क्षेत्र के नबीपुर गांव के पास सड़क किनारे रखी मिली हैं। 

सूचना मिलते ही देहली गांव में मानो दीप जल उठे, सबके होठों पर मुस्कान और चेहरे पर खुशी और सकून छलक रहा था। लोनी कटरा पुलिस ने मूर्तियों को अपने कब्जे में लेकर शिवगढ़ पुलिस को सौंप दिया। जांच के बाद पुष्टि हुई कि मूर्तियां पीतल और कांसे की मिश्रित धातु से बनी हैं। देर शाम शिवगढ़ पुलिस ने श्रद्धालुओं की मौजूदगी में मूर्तियां पुनः मन्दिर के पुजारी को सौंप दी गईं। मूर्तियों की वापसी पर भवानीगढ़ चौराहे से डीजे के साथ “राधे–राधे” और “जय श्रीकृष्ण” के जयकारों के उद्घोष के साथ मूर्तियां गांव ले जायी गई। मूर्तियां गांव पहुंचते ही लोग खुशी से झूम उठे, किसी की आंखें नम थीं तो कोई इसे प्रभु का चमत्कार बता रहा था। ज्ञात हो कि वर्ष 2013 में भी यही मूर्तियां चोरी हुई थी जो 14 महीने बाद मिली थीं। दूसरी बार भी उनकी वापसी ने गांव वालों के विश्वास को और मजबूत कर दिया है। 

ग्रामीणों का कहना है कि जहां सच्ची भक्ति होती है, वहां प्रभु स्वयं रास्ता बना लेते हैं। सबसे खास बात यह रही की बुधवार की सुबह जब मूर्तियां सड़क पर रखी मिली तो उनके वश्त्र बदले हुए थे, मूर्तियां चोरी होने से पहले राधा कृष्ण के वस्त्र लाल थे और जब मूर्तियां बरामद हुई तो उनके वस्त्र रेडियम जैसे हल्के हरे रंग के थे। जैसा की आप तस्वीरों में देख सकते हैं। आखिर इन कपड़ों के पीछे क्या रहस्य है, इसको लेकर लोग तरह के तरह के कयास लगा रहे हैं। लोगों का कहना है कि क्या इसके पीछे किसी तांत्रिक का हाथ है या मूर्तियां चुराने के बाद भगवान राधा- कृष्ण ने चोर को दण्ड दिया होगा इसके बाद वह मूर्तियों को सड़क पर छोड़ गया। वहीं श्रद्धालुओं का कहना कि राधा कृष्ण की इन मूर्तियों के प्रति श्रद्धालुओं की अटूट आस्था है, हर साल होली की दूसरे दिन इन मूर्तियों को पालकी में रखकर घर-घर घुमाया जाता है। जब श्रद्धालु भगवान के बिना नहीं रह सकते तो भगवान श्रद्धालुओं के बिना कहां रह पाएंगे, चोर तो मूर्तियों को चुरा कर ले गया किन्तु भगवान पुन: वापस अपने पावन देहली धाम लौट आए। शिवगढ़ थाना प्रभारी राजीव सिंह ने बताया कि ग्रामीण मूर्तियां अष्टधातु की बता रहे थे मूर्तियों की जांच कराई गई है दोनों मूर्तियां पीतल और कांसे की मिश्रित धातु से बनी है, जिन्हें मन्दिर के पुजारी के सुपुर्द कर दिया गया है।

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