प्रसिद्ध कथा व्यास पं.गोविन्द शास्त्री जी महराज ने कराया कथा का रसपान
रायबरेली। शिवगढ़ क्षेत्र के पूरे अवस्थी में चल रही संगीतमयी श्रीमद्भागवत के तीसरे दिन पं. गोविन्द शास्त्री जी महराज ने अपनी अमृतमई वाणी से श्रीमद्भागवत का बखान करते हुए बताया कि परीक्षित जी महराज राजा हुए तो एक बार वे आखेट के लिए जब जंगल पहुंचे तो उन्हे एक गाय टकराते हुए मिली यहां गाय का पर्याय पृथ्वी से है, पीछे से तीन पैर जिसके टूटे हुए हैं बैल अर्थात धर्म एक पैर पर चलकर लंगड़ाते हुए आता दिखाई पड़ा। उन्होंने बताया कि धर्म की तीन टांगों को कलयुग ने आते ही तोड़ दिया। परीक्षित जी से गौमाता ने कहा मेरे पीछे जो बैल आ रहा है वह कोई साधारण बैल नही है वो मूर्तिमान बैल धर्म है कलयुग ने आते ही जिसकी तीन टांगों को तोड़ दिया। कथा व्यास ने कहाकि कलयुग ने आते ही जिस धर्म की तीन टांगों को तोड़ दिया वह धर्म आज भी एक टांग पर खड़ा हुआ है क्योंकि यह पृथ्वी परीक्षित जैसे श्रोताओं तथा श्रीमद्भागवत कथा के आयोजकों एवं श्रवण मनन करने वालों से भरी पड़ी है।
जिन्होंने आज धर्म को बचा रहा रखा है। उन्होंने बताया कि सनातन धर्म दुनिया का सबसे पुराना धर्म है जो आज भी सभ्यता और संस्कृति को बचाए हुए हैं। सनातन धर्म हमें भक्ति, ज्ञान,वैराग्य तथा बड़ों का आदर सम्मान करने की शिक्षा देता है। जिसके पश्चात उन्होंने अमर कथा और सुखदेव जन्म की कथा का बड़ा ही सुन्दर वर्णन किया। इस मौके पर यजमान शिवशंकर अवस्थी, अजय कुमार अवस्थी, संजय कुमार अवस्थी, संयोग अवस्थी , चंद्र मोहन दीक्षित, राजेश शुक्ला, सूर्य प्रसाद अवस्थी, अनुराग अवस्थी, जगजीवन शुक्ला, राकेश त्रिवेदी, कन्हैया अवस्थी, अमित मिश्रा, नीरज अवस्थी, विकास गुप्ता साहित्य सैकड़ों की संख्या में श्रोता उपस्थित रहे।
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