शिवगढ़ (रायबरेली)। कठिन परिस्थितियों में भी यदि हौसले बुलंद हों तो सफलता का रास्ता स्वयं बन जाता है। शिवगढ़ क्षेत्र के बदावर गांव की बेटी नेहा श्रीवास्तव ने अपनी मेहनत, लगन और प्रतिभा के दम पर ऐसा मुकाम हासिल किया है, जिस पर पूरे क्षेत्र को गर्व है। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खण्डपीठ में अधिवक्ता के रूप में कार्यरत नेहा श्रीवास्तव का चयन न्यायालय मित्र एमिकस क्यूरी के पद पर हुआ है।
नेहा श्रीवास्तव, स्वर्गीय जगत नारायण श्रीवास्तव की पौत्री तथा गीता श्रीवास्तव और अखिलेश कुमार श्रीवास्तव की पुत्री हैं। जन्म के महज 15 दिन बाद पिता के घर छोड़कर जाने के बावजूद उनकी मां ने हार नहीं मानी। सीमित संसाधनों में उन्होंने पुत्री नेहा और पुत्र अमित श्रीवास्तव को शिक्षा दिलाकर आत्मनिर्भर बनने का मार्ग दिखाया। वर्ष 1996 में स्थापित विद्यालय के माध्यम से भी उन्होंने शिक्षा की अलख जगाई।
बचपन से मेधावी रहीं नेहा ने अंग्रेजी साहित्य में परास्नातक, बीएड तथा लखनऊ विश्वविद्यालय से एलएलबी की पढ़ाई पूरी की। वर्तमान में वह हाईकोर्ट की लखनऊ खण्डपीठ में प्रैक्टिस कर रही हैं। न्यायमूर्ति जसप्रीत सिंह एवं न्यायमूर्ति अमिताभ कुमार राय की पीठ द्वारा उन्हें न्याय मित्र के रूप में चयनित किया गया है। नेहा की यह उपलब्धि न केवल क्षेत्र की बेटियों के लिए प्रेरणा है, बल्कि यह संदेश भी देती है कि कठिनाइयां सफलता की राह में बाधा नहीं, बल्कि उसे और मजबूत बनाने का माध्यम बनती हैं। उनके चयन पर परिजनों, अधिवक्ताओं, शुभचिंतकों और क्षेत्रवासियों ने खुशी जताते हुए उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दी हैं।
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